Sunday, July 5, 2009

कुछ देर और मेरे पास यूं ही बनी रहो

मुश्किलों से मिलते हैं ये लम्हे साथ साथ
आओ करें आज जी भर के मुलाक़ात
अब यूं बार बार जाने की जिद ना करो
कुछ देर और मेरे पास यूं ही बनी रहो

दुनिया की बातें तो हमने बहुत हैं कर लीं
पर दिल है के इन बातों से भरता ही नहीं
अब कुछ मेरी सुनो कुछ अपनी भी कहो
कुछ देर और मेरे पास यूं ही बनी रहो

दिन, हफ्ते और महीने गुज़र जायेंगे
ऐसे लम्हे ना जाने फिर कब हाथ आयेंगे
आओ इन पलों को आज जी भर के जी लो
कुछ देर और मेरे पास यूं ही बनी रहो

तुम पास हो तो क्यूं आता नहीं यकीं
काश वक़्त आज थम जाये बस यहीं
आज ना जाने का कोई बहाना ही ढूढ़ लो
कुछ देर और मेरे पास यूं ही बनी रहो

पहलू भी बदलती हो तो लगता है तुम बस चली
अभी तो सिर्फ दोपहर हुई है शाम ढली भी नहीं
मेरे तपते दिल मैं इक बारिश बन कर बरसो
कुछ देर और मेरे पास यूं ही बनी रहो

तुम्हारे मन मैं उठे हैं आज बहुत से ख़याल
मेरे भी तन में उठें हैं आज बहुत से बवाल
तनमन एक हो जाने दो बस अब कुछ और ना कहो
कुछ और देर मेरे पास यूं ही बनी रहो

Thursday, July 2, 2009

कभी आते जाते ले जाना

तुम जब मुझसे मिलने आती थी
अपना कुछ न कुछ सामान
जान बूझ कर छोड़ जाती थी
तुम्हारा वो सब सामान
अब भी मेरे घर में रखा है
कभी आते जाते ले जाना

यादों के सहारे
तो जिंदगी नहीं काटी जा सकती
अपनी वो सब मुलाकातें
अब यादें बन कर
मेरे घर के हर कोने में पढ़ी हैं
कभी आते जाते ले जाना

तुमने प्यार का जो इज़हार किया था
कुछ लम्बे लम्बे ख़त लिख कर
तुम्हारे कुछ ख़त पड़े हैं
मेरे तकिये के नीचे
कभी आते जाते ले जाना

तुमने कभी मेरी जिंदगी
महकाई थी फूलों सी
वो कुछ सूखे फूल रखे हैं
मेरी जिंदगी की किताबों में
कभी आते जाते ले जाना

लम्हा लम्हा चुरा कर
कुछ वक़्त साथ था हमने गुज़ारा
इक पल के लिए भी
दूर रहना ना था गवारा
वो वक़्त अब थमा सा खडा है
मेरे घर के गलियारों में
कभी आते जाते ले जाना

मेरे नाम के साथ
अपना नाम लिखा था तुमने
घर की दीवारों पर
घर की राहों पर, आँगन मैं, चिनारों पर
वो नाम अब धुल की परत में ढक गए हैं
कभी आते जाते ले जाना

मेरा भी कोई सामान
शायद गलती से तुम्हारे साथ
चला गया होगा
दिल खो सा गया है
शायद तुम्हारे पास बेज़ार सा पड़ा होगा
कभी आते जाते दे जाना

Tuesday, June 9, 2009

कहीं ये प्यार तो नहीं

रातों में तारे गिनता हूँ
खाबों को दिन में बुनता हूँ
इक इक याद को चुनता हूँ
संगीत हवा में सुनता हूँ

कहीं ये प्यार तो नहीं

ख़यालों के सागर में बहता हूँ
बस अपनी धुन में रहता हूँ
कभी अपनी तुझसे सुनता हूँ
कभी तेरी तुझसे कहता हूँ

कहीं ये प्यार तो नहीं

कोई जान से प्यारा लगता है
जीने का सहारा लगता है
इंतज़ार सा किसी का रहता है
बेकरार सा दिल भटकता है

कहीं ये प्यार तो नहीं

होश में जब भी रहता हूँ
बस आहें भरता रहता हूँ
शक की नज़रें उठती हैं
जब कुछ भी नहीं मैं कहता हूँ

कहीं ये प्यार तो नहीं

सामने जब वो आती है
इक बिजली सी गिर जाती है
बेजान सा दिल धड़कता है
दिल पे छुरी चल जाती है

कहीं ये प्यार तो नहीं

Monday, June 8, 2009

वादा ना तोड़

वादा ना तोड़ 
वादा तो वादा है
वादे से राहत है
वादे से चाहत है
वादे से आशा है
वादे से निराशा है
वादा जीवन की उम्मीद है
वादा जीवन का संगीत  है
कभी वादे भी टूट जाते है
कभी साथी भी छूट जाते है
वादा किया तो निभाना
यही दस्तूर है पुराना

Saturday, June 6, 2009

तेरा ख़याल आता है

तेरा ख़याल आता है तो बस आता ही चला जाता है
आहट भी नहीं होती दिल में इक खंजर सा चल जाता है

कोई शिकवा नहीं के तू मेरे दिल में घर कर बैठी है 
भला अपनों पर कोई ऐसे इल्जाम लगाता है

इसके पहले के तेरे ख्यालों को में समेट सकूं
वक़्त है के हाथ से फिसल सा जाता है

तेरे ख्यालों को सहेज के रखने की चाह तो बहुत होती है
हाथ कलम, दवात और कागज़ तक नहीं पहुँच पाता है

तेरे ख़याल तो बहुत आते हैं पर कोई खबर नहीं आती
डाकिया भी अपना सा मुंह लेकर चला आता है

ख्यालों से निकलने पर नब्ज़ रुक सी जाती है
हकीम इसे लाइलाज कह के दवा देने से कतराता है

ख्यालों के सहारे तो जिन्दगी काटनी मुश्किल होगी
कभी आके तो मिल तुझे देखने को दिल ललचाता है

इश्क जब होता है

इश्क जब होता है सरे आम होता है
इश्क जब होता है सुबोह शाम होता है

इश्क वो नहीं हो जो आधा अधूरा 
इश्क में तो पूरा ही काम तमाम होता है

इश्क कभी किसी का मोहताज हुआ है क्या
इश्क में गरीब और अमीर सामान होता है

इश्क की राहों मैं बिछा देती है कांटे दुनिया
इश्क में काटों पर भी चलना आसान होता है

बदनामियों के डर से डरने वाले
इश्क ना करने वाला भी तो बदनाम होता है

इश्क करेंगे तो बनाम तो होंगे ही
बदनामियों से बचना क्या आसान होता है 

इश्क नहीं किया तो क्या राहों में कांटे नहीं होंगे
इश्क करने से जन्नत का रास्ता आसान होता है

इश्क के बिना भी बीत जाती हैं बहुत सी जिंदगियां
पर उनके लिए मरना क्या इतना आसान होता है

जो इश्क नहीं करते वो क्या ख़ाक जिया करते हैं
इश्क करने वालों पर तो खुदा को भी गुमान होता है

Wednesday, May 27, 2009

आज वो सब कह लेने दे

मुझे आज वो सब कह लेने दे 
कुछ देर और अपने पास रह लेने दे

बरसों सी छाये थे बादल ग़मों के
 ख़ुशी को अब आंसू बन के बह लेने दे

डर सा लगता है धुप के इन सायों से 
अपने आँचल की छाओं को थोडा सह लेने दे

हम दोनों जानते हैं के कुछ देर में बिछड़ना होगा 
कभी ना बिछडेंगे झूठ मूठ ही कह लेने दे

कल भी शाम होगी बस तू ना पास होगी 
चले जाना, बस मेरे सपनों के महल को तो ढह लेने दे

मुझे आज वो सब कह लेने दे 
कुछ देर और अपने पास रह लेने दे